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भेड एवम बकरी पालन

Bakri Palan Kyun

अगर आप Bakri palan के बारे मेें सोच रहे है और bakri palan बिजेनस प्रारम्भ करना चाहते है तो आपके लिए खुशखबरी है। Goat Farming in India ऐसा बिजनेस हॅै जिसे कोई भी थोड़ी सी लागत/पूंजी और जानकारी के साथ शुरू कर सकता है। साथ ही साथ बकरी पालन में जोखित और दूसरो बिजेनस से काफी कम है। वैसे तो आपको Bakri palan के अनेक बिजनेस प्लान मिल जायेंगे परन्तु जब तक व्यवहारिक ज्ञान नहीं होगा तब तक कोई भी बिजनेस को बड़ा रूप नहीं दिया जा सकता है।

गोट मीट की मांग India में हर जगह है तथा और मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है।

जहाॅ तक भारत में bakri palan ki jankari की व्यापकता का सवाल है हमें उसका जबाव सिर्फ इसी बात से मिल जाता है कि बकरे का मीट किसी भी धार्मिक विचारधारा या प्रतिबंध से मुक्त है अर्थात बकरे का मीट को सभी धर्मों, जातियों तथा सम्प्रदायों द्वारा खाने में व्यपकता से उपयोग किया जाता है। किसी तरह की धार्मिक पाबन्दी न होने के कारण बकरे का मीट अन्य मीटों की तुलना में अधिक लोकप्रिय है।

 

Bakri Palan आरम्भ कैसे करें

हमारे देश में Bakri Palan के अत्यधिक लाभ हैं जिनमें से प्रमुख हैं:-

  • यदि हम Bakri palan की तुलना अन्य पशुपालन जैसे गौ पालन या भैंस पालन से करें तो हमें पहला लाभ ये मिलता है कि इसके लिए गौ या भैंस पालन के मुकाबले काफी कम जगह चाहिए। दूसरी लाभ जितनी जगह में आप 1 भैंस या गाय पाल सकते हैं उतनी जगह में 5-7 बकरियाॅ आराम से पाली जा सकती हैं।
  • अधिकतर नस्ल की बकरियाॅ को गर्मी हो या ठण्ड या बारिश किसी भी वातावरण में ढलने की अद्भुत क्षमता होती है।
  • बकरियाॅ अन्य बडे़ पशुओं के मुकाबले बहुत छोटी होती हैं लेकिन ये परिपक्व बहुत जल्द हो जाती हैं।
  • बकरी का जीवित तथा मृत्यु के उपरान्त केवल एकमात्र ही उपयोग नहीं है। जहाॅ इसके माॅस का उपयोग लोग खानें में करते हैं वहीं इसके दूध का उपयोग पीने तथा 36 प्रकार की बीमारियों को दूर करने में किया जाता है।
  • बकरी के दूध का महत्वपूर्ण उपयोग डेंगू बीमारी को दूर करना हैं।
  • बकरी के बालों का उपयोग फाइबर बनाने में तथा खाल का उपयोग विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्र बनाने में किया जाता है।
  • Bakri palan को बहुत कम पूॅजी में भी शुरु किया जा सकता है। चूॅकि बकरियों के अनेकों नस्ल होती हैं जो साल में 2 बार बच्चे देती हैं और हर बार 2 से 3 बच्चे देती हैं। इसलिए इस व्यापार के जल्द से जल्द बढ़ने की अधिक सम्भानाएं होती हैं।
  • Goat farming को व्यवस्थित ढंग से चलाना अन्य फार्मों की तुलना में अधिक सरल होता है।
  • यदि आप पहले से कोई पशुपालन कर रहे हैं और Goat farming Training in India भी करना चाहते हैं तो आप बकरियों को वही जगह दे सकते हैं, जिस जगह पर आप पहले से पशुपालन कर रहे हैं।
  • Bakri palan in UP में आपको अपने उत्पादों की मार्केटिंग करने की जरुरत नहीं पड़ती क्योंकि मांग अधिक होने के कारण ग्राहक आपको ढ़ूढते-ढ़ूढते आपके फार्म हाउस तक पहॅुच जाते हैं।

जमीन का चुनाव:-

हमारे देश का हर कोना Goat Farm का व्यवसाय करने के लिए उपयुक्त माना गया है। हमें यह व्यवसाय शुरु करने के लिए अपने घर के आस-पास ही कोई जगह तलाश करनी है, जहाॅ से हम इस व्यवसाय को आसानी से क्रियान्वित कर सकें। इसके अतिरिक्त जमीन का चुनाव करते समय निम्न बातों का ध्यान रखा जाना बेहद आवश्यक
है:-

  • ऐसी जगह जमीन की तलाश करनी चाहिए जहाॅ शुद्ध पानी और हवा की प्रचुरता हो।
  • आस-पास के क्षेत्र में खेत हों ताकि आप आसानी से घास और अनाज पैदा कर सकें ताकि बकरियों को खिलाने का खर्च कम किया जा सके।
  • आस-पास के क्षेत्र में ऐसा मार्केट हो जहाॅ बकरी पालन से संबंधित वस्तुएं और दवाईयाॅ आसानी से उपलब्ध हो।
  • गाॅव के आस-पास ही Goat farming in UP,  India शुरु करने का सोचें क्यांेकि शहरों के मुकाबले गांवों में जमीन और लैबर बहुत सस्ते दामों में उलपब्ध रहते हैं।
  • बकरी पालन को क्षेत्र ऐसा हो जहाॅ आस-पास कोई पशु चिकित्सालय हो ताकि आपको टीके व अन्य दवाईयाॅ आसानी से उपलब्ध हो सके न हीं तो आपको सारी दवाईयाॅ और टीके अपने फार्म पर ही रखने पड़ेगें।
  • यातायात की सुविधा का होना जरुरी है ताकि जरुरत पड़ने पर आप अपनी जरुरत की वस्तुएं किसी नजदीकी मार्केट से खरीद सकें तथा अपने फार्म के उत्पादों को आसानी से बाजार में पहॅुचा और बेच सकें।

शेड निर्माणः-

Bakri palan करने के लिए बकरियों के लिए घर या शेड का निर्माण बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है। लेकिन हमारे देश में अभी तक इस क्रिया को एक महत्वपूर्ण स्थान नहीं दिया जाता क्यांेकि जो लोग छोटे पैमाने पर goat farming करते हैं वे बकरियों के लिए अलग सा घर न बना कर उन्हें अन्य पशुओं के साथ ही ठहरा देते हैं, जिससे उनकी उत्पादकता पर असर स्पश्ट तौर पर देखा जा सकता है। व्यवसायिक रुप से  bakri palan ki jankari  बहुत ही जरुरी हो जाता है कि बकरियों के रहने के लिए एक अलग मानक स्थान तैयार किया जाए और निम्न् बातों का स्पश्ट ध्यान रखा जाए कि:-

  • कोशिश करें कि बकरियों के रहने का स्थान जमीन से दो-तीन फीट ऊँचा हो। इसके लिए आप तख्त इत्यादि का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि गीलेपन और नमी से बकरियों मे बीमारी पैदा हो जाती है।
  • चूहों, मक्खियों, जूँ इत्यादि कीट पतंगे बकरियों के आवास पर बिलकुल नहीं होने चाहिए।
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  • आवास को हमेशा पूर्व-पष्चिम दिशा में बनवाना चाहिए, ताकि हवा का आवागमन आसानी से हो सके।
  • आवास से पानी निकास की उचित व्यवस्था पहले से ही करके रखें, ताकि फार्म की साफ-सफाई के दौरान पानी की निकास बाहर की ओर आसानी से हो सके।
  • इस बात की उचित व्यवस्था करें कि बकरियों के आवास में किसी भी प्रकार का पानी चाहे वो बारिश का हो या कोई अन्य, अन्दर न आने पाए। यह पानी बीमारियों की जड़ है।
  • आवास में तापमान को स्थिर रखने के लिए उचित प्रबन्ध करें। गर्मी तथा सर्दियों के लिए आवास में तापमान नियंत्रण के लिए उचित प्रबन्ध करें।
  • बकरी पालन से सम्बन्धित सभी तरह के उपकरणों, बर्तनों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

चारे की व्यवस्था

इन सबके अलावा Goat farming training in India व्यवसाय के लिए बकरियों के खान-पान का उचित प्रबन्ध रखना होगा।

  • बकरियों के लिए हरा चारा, गेंहॅू का भूसा (यदि संभव हो तो चना, अरहर तथा मसूर की दाल के भूसे का इंतजाम किया जा सकता है) आदि का प्रबन्ध कराना चाहिए।
  • दानें के रुप में बकरियों को गेंहॅू और टूटी हुई मक्का देना चाहिए।
  • इसके अलावा कटहल, नीम, पीपल, पाकड़ की पत्तियों को समय-समय पर हरे चारे के रुप में दे सकते हैं।

अतिरिक्त सलाह

  • बकरियाॅ बकरी पालन व्यवसाय की रीढ़ की हड्डी होती हैं इसलिए उनका अच्छ