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मछली पालन

Fish Farming (Machli Palan) Business – मछली पालन

अगर आप मछली पालन की सोच रही है और fish farming business को स्टार्ट करने का सोच रहे है तो आपको उसकी पूरी जानकारी प्राप्त करनी होगी। आपको बता दें की मछली पालन को अगर वैज्ञानिक तरीके (scientific way) से की जाये तो किसानो को बहुत हीं अच्छी उत्पादन मिलती है, और कम पूंजी से जायदा मुनाफा कमाया जा सकता है । निचे हम आपको machli palan की पूरी jankari देने जा रहे है। अगर आप हमारे बताए गए जानकारी के अनुसार machli palan करते है तो आपको बहुत  अच्छा benefit मिल सकता है ।

आज पुरे भारत में Fish meat की काफी अच्छी demand है और दिन प्रतिदिन इसकी मांग बढती ही जा रही है |  तजा रिपोर्ट के मुताबिक fish farming बिज़नस लगभग 15% की तेज रफ़्तार से बढ़ रहा है और कई लोगो के लिए jobs और business भी उत्पन कर रहा है | अभी चीन (China) fish farming में पहला स्थान (1st position) hold किया हुआ है पर हमारा देश भारत (India) भी 2nd number par hai.  अभी हमारे country में ज्यादातर लोग traditional tarike से ही machli palan kar rahe hai पर धीरे धीरे अब लोग scientific tarike se bhi मछली पालन कर रहे हैं |

 

मछली पालन के फायदे / Advantage of Fish Farming

आज के दिन में Fish farming के कई फायदे है जो की आर्थिक से लेकर स्वालंबी बनाने तक मदद करता है – तो चलिए जानते है इसके कुछ benefits के बारे में:§  मछली को छोटे तालाब या पोखर में पाला जा सकता है |

§  अगर आपके पास बड़ा तालाब नहीं है तो scientific तरीके से भी छोटे छोटे cement के size के गोलाकार में मछली पालन किया जा सकता है |

§  यह एक ही स्थान पर रहती है अतः आपको कही आने जाने की जरुरत नहीं होती है |

§  अगर आपने proper basic training ले ली  है तो आपको इसे पालने में आसानी होगी |

§  नस्ल के हिसाब से 4 से 7 महीनो के अन्दर इनका 1 kg से लेकर 5 kg तक weight बढ़ जाता है |

§  मछली के मांस में काफी अच्छी मात्र में protein होती है |

§  Fish farming के लिए bank से आसानी से loan मिल जाता है |

§  Today, fish production के मामलें में Andhra Pradesh 1st position पर है, उसके बाद West Bengal 2nd position पर, 3rd में Gujarat और 4th में Keral है |

 

Fish Farming kaise Suru Kare / How to Start Fish Farming

सबसे पहले हम आपको बता दें की machli palan में तलाबो का प्रबंधन सबसे ज्यादा अहम होती है। मछली पालन के लिए तालाबो की तैयारी बरसात (preparation of pound)  से पहले कर लेना चाहिए। Machli palan के लिए तलाबो के प्रबंधन को 3 parts में बांटा जाता है :-

§  संचयन से पहले का प्रबंधन

§  संचयन के समय का प्रबंधन

§  संचयन के बाद का प्रबंधन

 

संचयन से पहले तलाब का प्रबंधन :-

मछली के बीज का संचयन से पहले तलाब का प्रबंधन होता है “तलाब की तैयारी”। तलाब की तैयारी के लिए सबसे पहले तलाब में जो खरपतवार है हमे उसे तलाब से निकालना होगा। इसे निकालने के लिए आप labour की help ले सकते है या तलाब में जाल बिछा कर भी निकाल सकते है।

उसके बाद हम तलाब में जो मांसाहारी मछलियाँ है जो की पाले जाने वाले मछलियों को खा जाती है उसका नियंत्रण करेंगे। इसके लिए आप जाल की सहायता ले सकते है या 2500 kg प्रति hectare के दर से महुआ का खल्ली का प्रयोग कर के हम उसका नियंत्रण कर सकते है। इसके अलावा आप bleaching powder को 300 से 350 kg प्रति hectare के दर से इस्तेमाल कर सकते है । लेकिन याद रहे जब आप bleaching powder का प्रयोग कर रहे हो तो उसमे क्लोरीन की मात्रा 30% होनी चाहिए और सूर्यास्त के बाद हीं उसका उपयोग करना चाहिए।

इसके बाद हमे तलाब के कीड़े मकोड़े पर नियंत्रण करना होगा। इसके लिए आप 300 kg पैर hectare की दर से तलाब में चूना डाले इससे सभी कीड़े मकोड़े मर जाते हैं।

इतना होने के बाद अब हम fertilizer का management करेंगे । इसके लिए सबसे पहले हम सवा सौ(1.25 kg) प्रति hectare के दर से चुने का प्रयोग करेंगे । इसके बाद 250 kg प्रति hectare के दर से सरसों का खली , 5000 kg प्रति hectare के दर से गोबर , 250 kg प्रति hectare के दर से single super phosphate और सवा सौ प्रति hectare के दर से यूरिया तथा 50 kg प्रति hectare के दर से potash का प्रयोग कर के तलाब के पानी को एक सप्ताह के लिए ऐसे हीं छोड़ देना चाहिए । एक सप्ताह बाद हम तलाब में खाली जाल चलाएँगे । खाली जाल चलाने के बाद हम 1 kg प्रति hectare के दर से potassium permanganate का छिड़काव कर देंगे । इसके बाद हम next process की तैयारी करेंगे ।

 

संचयन के समय का प्रबंधन :-

मछली के बीज का संचय के समय का प्रबंधन में मछली की प्रजाति , मछली की संख्या , मछली का वजन , मछली की लम्बाई और किस समय में मछली की बीज डाले ये सभी बातें बहुत हीं महत्वपूर्ण होती है ।

 

मछली की प्रजाति  / Fishes’ Breed

पाले जाने वाले मछलीयों की प्रजातियों में 6 प्रजाति प्रमुख है :-

§  कतला

§  रेहू

§  म्रिगल

§  ग्रास कार्प,

§  सिल्वर कार्प और

§  कामन कार्प

 

मछली के ये छेओ प्रजातियां पानी के अलग अलग layer में रहती है। नीचे में रहने वाली मछलियाँ है म्रिगल और कामन कार्प का 40%, ऊपर में रहने वाली मछली है कतला और सिल्वर कार्प का 40%, और 20% बीच में रहने वाली मछली रेहू का संचय करना चाहिए , 10% ग्रास कार्प का संचय पूरे तलाब में करना चाहिए। इस तरह से तलाब का जो तीनो productivity layer है वो पूरी तरह से economically balance हो जाता है और किसान भाइयों को ज्यादा से ज्यादा उत्पादन मिलती है।

 

मछली का आकार और वजन / Size and Weight of Fish

संचय के समय मछली के बीज का आकार कम से कम 30 से 40 cm होनी चाहिए और उसका वजन कम से कम 50 gm होना चाहिए । year link का संचय करके यानि की इस साल का जो बीज है उसको अगले साल तक year link बना कर के बीज bank में रखे और फिर उसका प्रयोग करे ।

 

बीज को डालने का समय / Best time to put Fishes’ seeds

अगर आप 2 क्रॉप का planning करते है तो उसके लिए बीज डालने का सही समय Feb – June और July – November तक का होता है । अगर planning अगर एक क्रॉप का है तो उसके लिए June से अप्रैल तक का समय सही रहता है ।

 

बीज संचय से पहले ध्यान रहे की अगर आप बीज बाहर से ला रहे है तो उसका अंकुरण proper होना चाहिए। अगर आप बाहर से बीज लाते है तो जितना पानी आपके बीज वाले polythene bag में है उसमे उतना हीं पानी आप तलाब के भी मिलाएं। अब 10 minute तक उसको अंकुरण करे उसके बाद तलाब में बीज को उलट दें ।

 

संचयन के बाद का प्रबंधन

संचय के बाद आप कैसे उसकी देखभाल करते है उसी पर आपका उत्पादन depend करता है । इसके लिए आपको कुछ बातों पर ख़ास ध्यान देना होगा । जैसे की :-

§  ऊपरी आहार प्रबंधन और

§  उर्वरक प्रबंधन ।

 

ऊपरी आहार प्रबंधन  / Feed Management

वैज्ञानिक ढंग से मछली पालन करने में ऊपरी आहार का महत्वपूर्ण role है। आहार के रूप में आप चांवल की भूसी और सरसो की खली को बराबर मात्रा में मिला कर उसका इस्तेमाल कर सकते है या फिर आप market में मिलने वाले feed का भी इस्तेमाल कर सकते है । एक month में अगर हम मछलियों को 5% के दर से खाना खिलते है तो 25 kg per day हमारा feed requirement होता है। इसी तरह 2 month में अगर 4% के दर से खिलाएंगे तो 30 से 35 kg feed की अव्यश्कता पड़ती है , 3 month में 4% के दर से लगभग 55 kg, 4 month में 90 kg और 5 month में अगर 3% के दर से खिलाते है तो 108 kg per day feed की अव्यश्कता होती है । इस तरह से एक crop में हमे कम से कम 9 से 10 टन आहार की अव्यश्कता पड़ती है ।

 

मछली जल्दी बढ़े इसके लिए हमे probiotics का प्रयोग करना होगा । 5 से 10 gram feed में हम probiotics डालेंगे ।

 

उर्वरक प्रबंधन

संचय के बाद हर month में 2 बार उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए । अगर किसी month के पहली तारीक को आपने गोबर का प्रयोग 1000 से 1500 kg / hectare किया है तो फिर 15 तारीक को 25 से 30 kg / hectare के दर से single super phosphate और DAP का प्रयोग करेंगे । उर्वरक के प्रयोग से 2 दिन पहले कम से कम 10 से 15 kg calcium carbonate जो की agriculture lime stone है उसका उपयोग करेंगे ।

 

उर्वरक डालने से 2 दिन पहले चूना (lime) का प्रयोग करना चाहिए उसके बाद हर 15 दिन पर एक बार जैविक  खाद और उसके 15 दिन के बाद  रासायनिक खाद देना चाहिए ।

 

जिस month में तलाब का पानी ज्यादा हरा हो जाये उस month में रासायनिक